हिन्दी चेतना पत्रिका कनाडा के लिए व्यंग्य
गाजे बाजे से होगी मुस्कान कर की वसूली
अब
तक मुस्कान को जीवन प्रत्याशा का कारक माना जाता रहा है किन्तु इस भौतिकवादी युग
में संस्कार, जीवन मूल्यों के ह्रास के साथ मुस्कान का भी कोई
मूल्य नहीं रह गया है। यह सब बीते जमाने की बातें बनने जा रही हैं। चूंकि यह सूत्र
हमारे संस्कारों में बीज रूप में कहीं ना कहीं मौजूद है इसलिए इसे पूर्णतः समाप्त
नहीं किया जा सकता अतएव इसे सीमित रूप में एक बीमारी के तौर पर पढ़ाया जाएगा ताकि
उसका उपचार किया जा सके। अब से 50 बरस बाद आपको मुस्कराने की केवल औपचारिक शिक्षा दी
जाएगी ताकि आप इस बीमारी से पूरी तरह मुक्त हो सकें। तब सार्वजनिक उद्यानों और
निजी क्षेत्रों में चल रहे लाफ़्टर क्लबों पर प्रतिबंध लग जाएगा। केवल वे ही
व्यक्ति मुस्करा सकेंगे जो राष्ट्रीय मुस्कान विश्वविद्यालय अथवा उनके अधीनस्थ
मुस्कान महाविद्यालयों से पास आउट होंगे। जीवन में मुस्कराने के सब रास्ते बंद कर
दिये जाएंगे। जो मुस्करा नहीं सकते उन सभी को उत्पादक श्रेणी में माना जाएगा।
मुस्कान विश्वविद्यालाय से बैचलर और मास्टर डिग्री प्राप्त करने के बाद पीएचडी की
उपाधियाँ दी जाएंगी और वे एलोपेथी, आयुर्वेदिक, यूनानी चिकित्सको की भांति,
उदास, मरियल और सूमड़े किस्म के तमाम लोगों को अपनी थेरेपी से
मुस्कराना सिखाएँगे ताकि वे अपना अंतिम सांस सहज रूप से ले सकें ऐसे लोग मुस्कराने
के लिए वैसे ही इन डाक्टरों के पीछे भागेंगे जैसे आज डायबिटीज़,
कैंसर, एड्स, मोटापा आदि के इलाज के लिए भागते फिरते हैं। लोगों का जीवन
इतना तनावपूर्ण हो जाएगा कि जीवन से हंसी-खुशी लुप्त हो जाएगी। हर इंसान मशीन और
कंप्यूटर की तरह काम करेगा। खुशी का कोई अवसर ही सेश नहीं रह जाएगा। माँ-बाप,
अभिभावकों और गुरुजनों का सम्मान लगभग समाप्त हो जाएगा। सरकार की यह धारणा पुष्ट
होगी कि निजी क्षेत्र या सार्वजनिक क्षेत्र में कार्य करने वाले,
सभी अपनी ड्यूटी के बाद अकेले में या संयुक्त रूप से एक दूसरे पर मुस्कराने का
प्रयास जरूर करेंगे। ऐसी अवस्था में उत्पादन क्षमता या कार्य क्षमता कम होती है।
यह घाटे की अर्थ व्यवस्था को जन्म देती है जो राष्ट्रकी क्षति है,
इस क्षति को रकना जरूरी है । इसके लिए उनके वेतन में से हर माह एक निश्चित राशि
मुस्कान शुल्क के रूप में पहले ही काट ली जाए। वैसे तो किसी को ओवरटाइम ड्यूटी
करने के अवसर नहीं मिलेंगे लेकिन राज्य हित में ऐसी ड्यूटी करने वालों के वेतन से उनका
मुस्कान शुल्क अन्य कर्मचारियों की अपेक्षा 25 प्रतिशत कम वसूला जाएगा।
कोई
भी सरकार या कंपनी अपने कर्मचारियों से मुस्कान के अवसर छीनने की दृष्टि से परिवार
भ्रमण के लिए साल में एक बार दी जाने वाली एलटीसी की सुविधा नहीं देगी क्योंकि उस
समय मुस्कान के अधिक अवसर मिलने की संभावना बनी रहती है जिसे निरुत्साहित किया
जाना आवश्यक है। राष्ट्र की उन्नति के लिए
काम और सिर्फ काम ही जीवन का लक्ष्य बनाया जाएगा। पाँच दिवसीय कार्य सप्ताह को बढ़ाकर
छह दिनों का किया जाएगा । सप्ताह में एक दिन का जो अवकाश मिला करेगा उसका बेहतर
उपयोग स्त्री-पुरुष अपने घरेलू चीजों की ख़रीदारी, ड्राईक्लीनिंग,
रिश्तेदारों और अपने माता-पिता या वरिष्ठजन से मिलने में करेंगे तो मुस्कान से बच
सकेंगे। वर्किंग शादीशुदा लोगों को अपने बच्चे पैदा करने के लिए अपने नियोजकों से
अनुमति लेनी होगी। इसका कारण सरकार यह है कि बच्चे हमेशा जीवन में मुस्कान का कारण
बनते हैं और लोग अगर मुस्कराएँगे तो संस्थाओं में काम प्रभावित होगा। घर के बुजुर्गों
को भी बच्चे पालते समय मुस्कराने की बहुत ज्यादा छूट नहीं होगी । लोगों को हर
मुस्कान की गणना करके उसका टैक्स सरकारी खजाने में जमा कराना होगा। ‘हर
गलती कीमत मांगती है’ इस तर्ज पर गलती से भी किसी ने मुस्करा दिया तो
उसे ईमानदारी के साथ उस मुस्कान का भुगतान करना होगा।
हाँ,
धार्मिक स्थान, अस्पताल, मुरदाघर, श्मशान, कब्रिस्तान आदि में मुस्कराने पर कोई टैक्स नहीं लगेगा।
इसी तरह किसी भी चुनाव में प्रत्याशी के हार जाने पर कोई मुस्कराएगा तब भी टैक्स
नहीं लगेगा। सार्वजनिक उदयानों, कहवाघरों, कॉफी हाऊस, बार, होटल, रेस्टोरेंट्स आदि में प्रवेश पर ही एक मुश्त
मुस्कान टैक्स बिल में वसूल किया जाएगा। अगर कोई इन स्थानों पर नहीं मुस्कराने का
वचन देगा तो उनसे सशर्त मुस्कान कर नहीं वसूला जाएगा लेकिन इसके बावजूद किसी ने मुस्कान
बिखेरी तो उससे जुर्माने के तौर पर चौगुना कर वसूला जाएगा।
मुस्कान
विश्वविद्यालय से उत्तीर्ण पीएचडी धारक जितने भी लोगों को प्रतिदिन मुस्कराहट के
रोगियों से जितना शुल्क वसूल करेंगे उन्हें उसका 30 प्रतिशत भाग सरकार के खजाने
में प्रतिदिन ऑनलाइन जमा करवाना और मरीजों का रिकार्ड रखना अनिवार्य होगा। मुस्कान
विश्वविद्यालय अथवा मुस्कान महाविद्यालय के प्राध्यापक कक्षाओं मे जो शिक्षा देंगे
उन पर कोई शुल्क लागू नहीं होगा किन्तु यदि वे किसी सेमिनार,
संगोष्ठी आदि में जाएंगे तो उनसे निर्धारित शुल्क वसूला जाएगा।
आम
चुनाव के समय अक्सर प्रत्याशी मतदाताओं से मुस्कराकर ही वोट मांगते हैं। ऐसे में निर्वाचन
आयोग प्रत्याशी प्रत्येक प्रत्याशी का चुनाव में प्रचार अभियान की अवधि तक मुस्कान
का आकलन कर एक निर्धारित राशि तय करेगा करेगा
जिसे चुनाव सम्पन्न होते ही प्रत्याशी अपने चुनाव खर्च के हिसाब किताब के साथ जमा कराएगा।
उनसे इस प्रकार की वसूली में कोई कोताही नहीं हो, इसके लिए चुनाव
पर्यवेक्षकों को ज़िम्मेदारी सौंपी जाएगी । निर्दलीय या दल विशेष का प्रत्याशी यह शुल्क
निर्धारित तिथि पूर्व घोषित अवधि तक जमा नहीं कराएगा तो उसके दल की मान्यता समाप्त
की जा सकेगी और उसे अगले चुनाव में खड़े होने की अनुमति नहीं मिलेगी । साथ ही उसको
ये शुल्क पेनल्टी के साथ अनिवार्य रूप से जमा कराना ही होगा।
सरकारी
दफ्तरों में किसी भी आगंतुक का स्वागत मुस्कान के साथ करने पर पाबंदी होगी और कोई
अधिकारी या कर्मचारी इसका उल्लंघन करते पाया गया तो उसके खिलाफ अनुशासनिक
कार्यवाही की जाएगी एवं उसका प्रमोशन भी
रोका जा सकेगा। सरकारों के मुखिया यथा राष्ट्रपति, प्रधान मंत्री,
मंत्री और प्रदेश सरकारों के मुखिया जब किसी राजनयिक या अंतर्राष्ट्रीय ऋणदाता कोष
या कंपनी के शिष्टमण्डल का स्वागत करने या भोज के लिए जाएंगे तो वे मुस्कान के साथ
उनका स्वागत कर सकेंगे। इसके अलावा किसी और अवसरों पर मुस्कान की छूट नहीं होगी।
सरकार
देश में साल में एक बार योग दिवस की भांति ‘मुस्कान दिवस’ का भी आयोजन करेगी और उस दिन सारा राष्ट्र
नि:शुल्क मुस्करा सकेगा। इसके साथ ही यह भी सुनिश्चित किया जाएगा कि कोई भी व्यक्ति
मुस्कान का भौंडा प्रदर्शन नहीं करेगा। सरकार
द्वारा घोषित अवकाशों में लोग मुस्कान तो बिखेर सकेंगे लेकिन केवल अपने परिवार के
व्यक्तियों तक सीमित रखेंगे। इसके लिए सुबह 5 बजे से शाम आठ बजे तक का समय
निर्धारित रहेगा। यदि व्यक्ति तीन या तीन
से अधिक मित्रों के साथ बैठकर मुस्कराएँगे तो निर्धारित शुल्क अदा करना पड़ेगा।
अन्य दिनों में मुस्कराने पर नियम और शर्तें लागू होंगी। भारत के बाहर भ्रमण पर
जाने पर कोई भी व्यक्ति मुस्करा सकता है किन्तु राष्ट्रीय सीमा में आने वाले किसी
भी हवाई अड्डे पर कोई नहीं मुस्करा सकेगा । अंतराष्ट्रीय हवाई उड़ान भरने के बाद ही
आप नि:शुल्क मुस्करा सकते हैं। ऐसे में जब किसी नागरिक या नागरिकों को मुस्कराने
की समस्या जब ज्यादा ही पेश आए तो वह विदेश भ्रमण पर जा सकेंगे किन्तु राजकीय
अधिकारियों को एक माह से अधिक के दौरे की इजाजत नहीं दी जाएगी। साथ ही वे व्यक्ति जो
किसी भी अवस्था में मुस्कराने योग्य नहीं रह गए हैं उन्हें अपनी वीजा अवधि तीन माह
तक बढ़ा सक्ने की छूट होगी।
अस्सी
बरस से अधिक के वरिष्ठ नागरिकों को सरकार मुस्कराने पर विशेष छूट देगी। मूक,
बधिरों और नेत्रहीन लोगों के मुस्कराने पर भी कोई शुल्क नहीं लगेगा। ऐसे व्यक्ति
जो दिव्यांग होने का झूठा प्रदर्शन या ढोंग करके मुस्कराते हुए पाये जाएंगे उन्हें
आर्थिक दंड और जेल दोनों भुगतने होंगे। सरकार ऐसा उपक्रम करेगी कि लोग मुस्कराने
से बचें। इसी प्रकार राजकीय सेवाओं में सेवारत अधिकारियों और कर्मचारियों को कम से
कम मुस्कराने के लिए इंटेन्सिव भी दिया जाएगा। पुलिस विभाग,
सेना या इसी प्रकार के अन्य सैन्य बलों और अर्ध सैन्य बलों में तो मुस्कान पर पूरी
तरह पाबंदी रहेगी बल्कि मुस्कराहट रोकने के तरीकों पर इन सेवाओं के अधिकारियों को
विशेषज्ञ के तौर पर अन्य सेवा संस्थानों
में समय-समय पर व्याख्यान के लिए आमंत्रित किया जाएगा। सरकार कम से कम मुस्कराने
वाले व्यक्ति को राष्ट्रीय मुस्कान दिवस के अवसर पर ग्राम,
तहसील, जिला, प्रदेश और राष्ट्रीय स्तर पर हर वर्ष सम्मानित करेगी
ताकि अन्य व्यक्तियों को भी इससे प्रेरणा मिले। मुस्कान के साथ सेवा जैसे निरर्थक
नारे प्रतिबंधित होंगे। देश की तमाम सरकारी और गैर सरकारी विज्ञापन एजेंसियों को यह
कड़ी हिदायत दी जाएगी कि वे ऐसा कोई विज्ञापन तैयार नहीं करें जिससे मुस्कान जैसी
वाहियात आदत को अनुचित प्रोत्साहन मिले। आप इसके लिए तैयार हैं ना !
फारूक
आफरीदी
बी-70/102, प्रगति
पथ, बजाज नगर,
जयपुर-302015
मोबाइल : 94143 35772
Email : faindia2015@gmail.com

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